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महाभारत 12.181.15
वर्णाश्चत्वार एते हि येषां ब्राह्मी सरस्वतीविहिता ब्रह्मणा पूर्वं लोभात्त्वज्ञानतां गताः
varṇāścatvāra ete hi yeṣāṃ brāhmī sarasvatīvihitā brahmaṇā pūrvaṃ lobhāttvajñānatāṃ gatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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