महाभारत 12.185.22
असत्कर्माणि कुर्वन्तस्तिर्यग्योनिषु चापरेक्षीणायुषस्तथैवान्ये नश्यन्ति पृथिवीतले
asatkarmāṇi kurvantastiryagyoniṣu cāparekṣīṇāyuṣastathaivānye naśyanti pṛthivītale
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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