महाभारत 12.192.113
राजोवाचजलमेतन्निपतितं मम पाणौ द्विजोत्तमसममस्तु सहैवास्तु प्रतिगृह्णातु वै भवान्
rājovācajalametannipatitaṃ mama pāṇau dvijottamasamamastu sahaivāstu pratigṛhṇātu vai bhavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें