महाभारत 12.192.55
ददस्वेति त्वया चोक्तं ददामीति तथा मयान वाचं दूषयिष्यामि सत्यं रक्ष स्थिरो भव
dadasveti tvayā coktaṃ dadāmīti tathā mayāna vācaṃ dūṣayiṣyāmi satyaṃ rakṣa sthiro bhava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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