महाभारत 12.192.64
सत्यं वेदेषु जागर्ति फलं सत्ये परं स्मृतम्सत्याद्धर्मो दमश्चैव सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्
satyaṃ vedeṣu jāgarti phalaṃ satye paraṃ smṛtamsatyāddharmo damaścaiva sarvaṃ satye pratiṣṭhitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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