महाभारत 12.194.2
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्मनोः प्रजापतेर्वादं महर्षेश्च बृहस्पतेः
atrāpyudāharantīmamitihāsaṃ purātanammanoḥ prajāpatervādaṃ maharṣeśca bṛhaspateḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें