महाभारत 12.199.24
सूक्ष्मेण मनसा विद्मो वाचा वक्तुं न शक्नुमःमनो हि मनसा ग्राह्यं दर्शनेन च दर्शनम्
sūkṣmeṇa manasā vidmo vācā vaktuṃ na śaknumaḥmano hi manasā grāhyaṃ darśanena ca darśanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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