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महाभारत 12.2.16
रामस्तं प्रतिजग्राह पृष्ट्वा गोत्रादि सर्वशःउष्यतां स्वागतं चेति प्रीतिमांश्चाभवद्भृशम्
rāmastaṃ pratijagrāha pṛṣṭvā gotrādi sarvaśaḥuṣyatāṃ svāgataṃ ceti prītimāṃścābhavadbhṛśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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