महाभारत 12.2.29
इत्युक्तो ब्राह्मणेनाथ कर्णो दैन्यादधोमुखःराममभ्यागमद्भीतस्तदेव मनसा स्मरन्
ityukto brāhmaṇenātha karṇo dainyādadhomukhaḥrāmamabhyāgamadbhītastadeva manasā smaran
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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