महाभारत 12.2.2एवमेतन्महाबाहो यथा वदसि भारतन कर्णार्जुनयोः किंचिदविषह्यं भवेद्रणेevametanmahābāho yathā vadasi bhāratana karṇārjunayoḥ kiṃcidaviṣahyaṃ bhavedraṇeइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें