महाभारत 12.20.5
तस्मात्पार्थ महायज्ञैर्यजस्व बहुदक्षिणैःस्वाध्याययज्ञा ऋषयो ज्ञानयज्ञास्तथापरे
tasmātpārtha mahāyajñairyajasva bahudakṣiṇaiḥsvādhyāyayajñā ṛṣayo jñānayajñāstathāpare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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