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महाभारत 12.201.2
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
श्रूयतां भरतश्रेष्ठ यन्मा त्वं परिपृच्छसिप्रजानां पतयो ये स्म दिक्षु प्रत्येकशः स्मृताः
śrūyatāṃ bharataśreṣṭha yanmā tvaṃ paripṛcchasiprajānāṃ patayo ye sma dikṣu pratyekaśaḥ smṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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