महाभारत 12.205.3
सद्भिराचरितत्वात्तु वृत्तमेतदगर्हितम्इयं सा बुद्धिरन्येयं यया याति परां गतिम्
sadbhirācaritatvāttu vṛttametadagarhitamiyaṃ sā buddhiranyeyaṃ yayā yāti parāṃ gatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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