महाभारत 12.207.12
योषितां न कथाः श्राव्या न निरीक्ष्या निरम्बराःकदाचिद्दर्शनादासां दुर्बलानाविशेद्रजः
yoṣitāṃ na kathāḥ śrāvyā na nirīkṣyā nirambarāḥkadāciddarśanādāsāṃ durbalānāviśedrajaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें