महाभारत 12.21.11
अद्रोहः सत्यवचनं संविभागो धृतिः क्षमाप्रजनः स्वेषु दारेषु मार्दवं ह्रीरचापलम्
adrohaḥ satyavacanaṃ saṃvibhāgo dhṛtiḥ kṣamāprajanaḥ sveṣu dāreṣu mārdavaṃ hrīracāpalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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