महाभारत 12.211.39
जरया हि परीतस्य मृत्युना वा विनाशिनादुर्बलं दुर्बलं पूर्वं गृहस्येव विनश्यति
jarayā hi parītasya mṛtyunā vā vināśinādurbalaṃ durbalaṃ pūrvaṃ gṛhasyeva vinaśyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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