महाभारत 12.214.5
सदोपवासी च भवेद्ब्रह्मचारी सदैव चमुनिश्च स्यात्सदा विप्रो दैवतं च सदा भजेत्
sadopavāsī ca bhavedbrahmacārī sadaiva camuniśca syātsadā vipro daivataṃ ca sadā bhajet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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