महाभारत 12.217.30
नमस्तस्यै दिशेऽप्यस्तु यस्यां वैरोचनो बलिःइति मामभ्यपद्यन्त बुद्धिमात्सर्यमोहिताः
namastasyai diśe'pyastu yasyāṃ vairocano baliḥiti māmabhyapadyanta buddhimātsaryamohitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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