महाभारत 12.217.37
पश्यामि त्वा विराजन्तं देवराजमवस्थितम्श्रीमन्तं द्युतिमन्तं च गर्जन्तं च ममोपरि
paśyāmi tvā virājantaṃ devarājamavasthitamśrīmantaṃ dyutimantaṃ ca garjantaṃ ca mamopari
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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