महाभारत 12.22.8
स भवान्सर्वधर्मज्ञः सर्वात्मा भरतर्षभराजा मनीषी निपुणो लोके दृष्टपरावरः
sa bhavānsarvadharmajñaḥ sarvātmā bharatarṣabharājā manīṣī nipuṇo loke dṛṣṭaparāvaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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