महाभारत 12.221.56
भिक्षां बलिमदत्त्वा च स्वयमन्नानि भुञ्जतेअनिष्ट्वा संविभज्याथ पितृदेवातिथीन्गुरून्
bhikṣāṃ balimadattvā ca svayamannāni bhuñjateaniṣṭvā saṃvibhajyātha pitṛdevātithīngurūn
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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