महाभारत 12.221.60
प्राकारागारविध्वंसान्न स्म ते प्रतिकुर्वतेनाद्रियन्ते पशून्बद्ध्वा यवसेनोदकेन च
prākārāgāravidhvaṃsānna sma te pratikurvatenādriyante paśūnbaddhvā yavasenodakena ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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