महाभारत 12.224.8
कृष्णद्वैपायनं व्यासं पुत्रो वैयासकिः शुकःपप्रच्छ संदेहमिमं छिन्नधर्मार्थसंशयम्
kṛṣṇadvaipāyanaṃ vyāsaṃ putro vaiyāsakiḥ śukaḥpapraccha saṃdehamimaṃ chinnadharmārthasaṃśayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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