महाभारत 12.225.5अपामपि गुणांस्तात ज्योतिराददते यदाआपस्तदा आत्तगुणा ज्योतिष्युपरमन्ति चapāmapi guṇāṃstāta jyotirādadate yadāāpastadā āttaguṇā jyotiṣyuparamanti caइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें