महाभारत 12.226.28
करंधमस्य पुत्रस्तु मरुत्तो नृपतिस्तथाकन्यामङ्गिरसे दत्त्वा दिवमाशु जगाम ह
karaṃdhamasya putrastu marutto nṛpatistathākanyāmaṅgirase dattvā divamāśu jagāma ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें