महाभारत 12.227.3
एवं धर्मेण वर्तेत क्रियाः शिष्टवदाचरेत्असंरोधेन भूतानां वृत्तिं लिप्सेत वै द्विजः
evaṃ dharmeṇa varteta kriyāḥ śiṣṭavadācaretasaṃrodhena bhūtānāṃ vṛttiṃ lipseta vai dvijaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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