महाभारत 12.232.32
अपि वर्णावकृष्टस्तु नारी वा धर्मकाङ्क्षिणीतावप्येतेन मार्गेण गच्छेतां परमां गतिम्
api varṇāvakṛṣṭastu nārī vā dharmakāṅkṣiṇītāvapyetena mārgeṇa gacchetāṃ paramāṃ gatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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