महाभारत 12.233.8
कर्मणा जायते प्रेत्य मूर्तिमान्षोडशात्मकःविद्यया जायते नित्यमव्ययो ह्यव्ययात्मकः
karmaṇā jāyate pretya mūrtimānṣoḍaśātmakaḥvidyayā jāyate nityamavyayo hyavyayātmakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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