महाभारत 12.234.15
चतुष्पदी हि निःश्रेणी ब्रह्मण्येषा प्रतिष्ठिताएतामाश्रित्य निःश्रेणीं ब्रह्मलोके महीयते
catuṣpadī hi niḥśreṇī brahmaṇyeṣā pratiṣṭhitāetāmāśritya niḥśreṇīṃ brahmaloke mahīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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