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महाभारत 12.237.1
शुक उवाच · śuka uvāca
वर्तमानस्तथैवात्र वानप्रस्थाश्रमे यथायोक्तव्योऽऽत्मा यथा शक्त्या परं वै काङ्क्षता पदम्
vartamānastathaivātra vānaprasthāśrame yathāyoktavyo''tmā yathā śaktyā paraṃ vai kāṅkṣatā padam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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