महाभारत 12.238.9
हित्वा तु सर्वसंकल्पान्सत्त्वे चित्तं निवेशयेत्सत्त्वे चित्तं समावेश्य ततः कालंजरो भवेत्
hitvā tu sarvasaṃkalpānsattve cittaṃ niveśayetsattve cittaṃ samāveśya tataḥ kālaṃjaro bhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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