महाभारत 12.24.5
सोऽभिगम्याश्रमं भ्रातुः शङ्खस्य लिखितस्तदाफलानि शातयामास सम्यक्परिणतान्युत
so'bhigamyāśramaṃ bhrātuḥ śaṅkhasya likhitastadāphalāni śātayāmāsa samyakpariṇatānyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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