महाभारत 12.241.9
एवं बुद्ध्वा नरः सर्वां भूतानामागतिं गतिम्समवेक्ष्य शनैः सम्यग्लभते शममुत्तमम्
evaṃ buddhvā naraḥ sarvāṃ bhūtānāmāgatiṃ gatimsamavekṣya śanaiḥ samyaglabhate śamamuttamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें