महाभारत 12.242.5
तानि सर्वाणि संधाय मनःषष्ठानि मेधयाआत्मतृप्त इवासीत बहु चिन्त्यमचिन्तयन्
tāni sarvāṇi saṃdhāya manaḥṣaṣṭhāni medhayāātmatṛpta ivāsīta bahu cintyamacintayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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