महाभारत 12.243.21
तमतिक्रान्तकर्माणमतिक्रान्तगुणक्षयम्ब्राह्मणं विषयाश्लिष्टं जरामृत्यू न विन्दतः
tamatikrāntakarmāṇamatikrāntaguṇakṣayambrāhmaṇaṃ viṣayāśliṣṭaṃ jarāmṛtyū na vindataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें