महाभारत 12.243.2
सर्वान्वेदानधीयीत शुश्रूषुर्ब्रह्मचर्यवान्ऋचो यजूंषि सामानि न तेन न स ब्राह्मणः
sarvānvedānadhīyīta śuśrūṣurbrahmacaryavānṛco yajūṃṣi sāmāni na tena na sa brāhmaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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