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महाभारत 12.248.10
स तस्मै सर्वमाचष्ट यथा वृत्तं जनेश्वरःशत्रुभिर्ग्रहणं संख्ये पुत्रस्य मरणं तथा
sa tasmai sarvamācaṣṭa yathā vṛttaṃ janeśvaraḥśatrubhirgrahaṇaṃ saṃkhye putrasya maraṇaṃ tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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