महाभारत 12.249.8
तदेतद्भस्मसाद्भूतं जगत्सर्वमुपप्लुतम्प्रसीद भगवन्साधो वर एष वृतो मया
tadetadbhasmasādbhūtaṃ jagatsarvamupaplutamprasīda bhagavansādho vara eṣa vṛto mayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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