महाभारत 12.250.5
प्रियान्पुत्रान्वयस्यांश्च भ्रातॄन्मातॄः पितॄनपिअपध्यास्यन्ति यद्देव मृतांस्तेषां बिभेम्यहम्
priyānputrānvayasyāṃśca bhrātṝnmātṝḥ pitṝnapiapadhyāsyanti yaddeva mṛtāṃsteṣāṃ bibhemyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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