महाभारत 12.252.2
भूयांसो हृदये ये मे प्रश्नास्ते व्याहृतास्त्वयाइममन्यं प्रवक्ष्यामि न राजन्विग्रहादिव
bhūyāṃso hṛdaye ye me praśnāste vyāhṛtāstvayāimamanyaṃ pravakṣyāmi na rājanvigrahādiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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