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महाभारत 12.253.17
ततः कदाचित्स मुनिर्वर्षास्वाकाशमास्थितःअन्तरिक्षाज्जलं मूर्ध्ना प्रत्यगृह्णान्मुहुर्मुहुः
tataḥ kadācitsa munirvarṣāsvākāśamāsthitaḥantarikṣājjalaṃ mūrdhnā pratyagṛhṇānmuhurmuhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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