महाभारत 12.253.8
तुलाधारो वणिग्धर्मा वाराणस्यां महायशाःसोऽप्येवं नार्हते वक्तुं यथा त्वं द्विजसत्तम
tulādhāro vaṇigdharmā vārāṇasyāṃ mahāyaśāḥso'pyevaṃ nārhate vaktuṃ yathā tvaṃ dvijasattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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