महाभारत 12.255.33
निराशिषमनारम्भं निर्नमस्कारमस्तुतिम्अक्षीणं क्षीणकर्माणं तं देवा ब्राह्मणं विदुः
nirāśiṣamanārambhaṃ nirnamaskāramastutimakṣīṇaṃ kṣīṇakarmāṇaṃ taṃ devā brāhmaṇaṃ viduḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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