महाभारत 12.258.16
गुरुरग्र्यः परो धर्मः पोषणाध्ययनाद्धितःपिता यदाह धर्मः स वेदेष्वपि सुनिश्चितः
gururagryaḥ paro dharmaḥ poṣaṇādhyayanāddhitaḥpitā yadāha dharmaḥ sa vedeṣvapi suniścitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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