महाभारत 12.26.25
यन्निमित्तं भवेच्छोकस्तापो वा दुःखमूर्छितःआयासो वापि यन्मूलस्तदेकाङ्गमपि त्यजेत्
yannimittaṃ bhavecchokastāpo vā duḥkhamūrchitaḥāyāso vāpi yanmūlastadekāṅgamapi tyajet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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