महाभारत 12.260.32
आम्नायमार्षं पश्यामि यस्मिन्वेदाः प्रतिष्ठिताःतं विद्वांसोऽनुपश्यन्ति ब्राह्मणस्यानुदर्शनात्
āmnāyamārṣaṃ paśyāmi yasminvedāḥ pratiṣṭhitāḥtaṃ vidvāṃso'nupaśyanti brāhmaṇasyānudarśanāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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