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महाभारत 12.260.8
स बुद्धिमुत्तमां प्राप्तो नैष्ठिकीमकुतोभयाम्स्मरामि शिथिलं सत्यं वेदा इत्यब्रवीत्सकृत्
sa buddhimuttamāṃ prāpto naiṣṭhikīmakutobhayāmsmarāmi śithilaṃ satyaṃ vedā ityabravītsakṛt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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