महाभारत 12.261.16श्रिया विहीनैरलसैः पण्डितैरपलापितम्वेदवादापरिज्ञानं सत्याभासमिवानृतम्śriyā vihīnairalasaiḥ paṇḍitairapalāpitamvedavādāparijñānaṃ satyābhāsamivānṛtamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें