महाभारत 12.261.29
अनुत्तरीयवसनमनुपस्तीर्णशायिनम्बाहूपधानं शाम्यन्तं तं देवा ब्राह्मणं विदुः
anuttarīyavasanamanupastīrṇaśāyinambāhūpadhānaṃ śāmyantaṃ taṃ devā brāhmaṇaṃ viduḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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