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महाभारत 12.261.59
यद्येतदेवं कृत्वापि न विमोक्षोऽस्ति कस्यचित्धिक्कर्तारं च कार्यं च श्रमश्चायं निरर्थकः
yadyetadevaṃ kṛtvāpi na vimokṣo'sti kasyacitdhikkartāraṃ ca kāryaṃ ca śramaścāyaṃ nirarthakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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